Bicchoo Ka Khel Review: provocative romances, intrigues and colorful characters, Divinendu’s scorpion game dazzling detective novels – Bicchoo Ka Khel Review : देखेंगे तो देखते चले जाएंगे मर्डर-अंतरंग सीन-जासूसी से भरपूर ‘बिच्‍छू का खेल’

वेब सीरिज ‘मिर्ज़ापुर’ के बाद सफलता के शिखर पर विराजमान दिव्येंदु की सोलो लीड रोल वाली नई वेब सीरीज़ ‘बिच्छू का खेल’ ZEE 5 और ऑल्ट बालाजी पर चयन हो चुकी है। ‘बिच्छू का खेल’ में वे सभी मसाले गए हैं, जिससे वेब सीरिज की सफलता तय होती है।

देखें तो देखें चले जाएंगे मर्डर-अंतरंग सीन से खूब ‘बिंदू का खेल’ (फोटो क्रेडिट: फाइल फोटो)

नई दिल्ली:

वेब सीरिज ‘मिर्ज़ापुर’ के बाद सफलता के शिखर पर विराजमान दिव्येंदु की सोलो लीड रोल वाली नई वेब सीरीज़ ‘बिच्छू का खेल’ ZEE 5 और ऑल्ट बालाजी पर चयन हो चुकी है। ‘बिच्छू का खेल’ में वे सभी मसाले गए हैं, जिससे वेब सीरिज की सफलता तय होती है। गाली-गलौज से भरपूर डायलॉग, परत-दर-परत परतें-खुलेसे, भड़काऊ उपन्यास, रंगीन-मिज़ाज किरदार … वगैरह वगैरह। यह वेब सीरिज देखने के बाद वैसी ही फीलिंग आता है, जैसे हिंदी का जासूसी उपन्यास पढ़ने के बाद आता है।

वेब सीरिज ‘बिच्छू का खेल’ जासूसी उपन्यासकार अमित ख़ान के इसी नाम से आया उपन्यास पर आधारित है या यूं कहें कि उस उपन्यस्य के किरदारों को पाठक्रीन पर उतार दिया गया है। 9 नंबर की वेब सीरिज ‘बिच्छू का खेल’ की कहानी वाराणसी में फिल्माई गई है। कहानी की शुरुआत कॉलेज फंक्‍शन में शहर के नामी वकील अनिल चौबे (सत्यजीत शर्मा) की हदयया से शुरू होती है, जो समारोह में मुख्‍य अतिथि बनकर पहुंचे थे। वेब सीरिज का नायक अखिल श्रीवास्तव (दिव्येंदु) भरी महफ़िल में अनिल चौबे की हत्या कर थाने में आत्मसमर्पण करने पहुंच जाता है और वहां पुलिस अधिकारी निकुंज तिवारी (सैयद ज़शान क़ादरी) को पूरी कहानी बयां करता है। अखिल यह भी बताता है कि वह अनिल चौबे की बेटी रश्मि चौबे (अंशुल चौहान) से प्रियार करता है।

अखिल अपने पिता बाबू (मुकुल चड्ढा) के साथ मिठाई की एक दुकान में काम करता है। मिठाई की दुकान अनिल चौबे के बड़े भाई मुकेश चौबे (राजेश शर्मा) की होती है। अखिल का पिता बाबू रंगीनमिजाज है और मुकेश की पत्नी प्रतिमा चौबे (तृष्णा मुखर्जी) से उसके अंतरंग रिश्‍ते हैं। बाहुबली मुन्ना सिंह (गौतम बब्बर) की हदयया के आरोप में बाबू फंस जाता है और जेल भेज दिया जाता है, जहां उसकी हदयया हो जाती है। अखिल अपने पिता बाबू की हदयया के प्रतिशोध में जलता रहता है और संशोधित लेने के लिए निकलता है। इस दौरान उसे कई पेपरों की जानकारी होती है। वेब सीरिज में यह देखने दिचलसप होगा कि अखिल ख़ुद को अनिल चौबे की हेडीया के आरोपों से कैसे बचा ले जाता है और साथ ही कैसे अपने पिता के क़तील तक पहुंचता है? कुल मिलाकर ‘बिस्सू का खेल’ यही है।

अगर आपने मिर्जापुर को देखा है तो ‘बिच्छू का खेल’ के अखिल में मुन्ना त्रिपाठी की छवि आपको दिखेगी, लेकिन अखिल में दबंगई का भाव नहीं है। हालांकि सीरिज ख्रेडम होते-होते दिव्येंदु त्रिपाठी अखिल को मुन्ना त्रिपाठी के किरदार से अलग करने में सफल होते हैं। रश्मि के किरदार में अंशुल चौहान की केमिस्ट्री बेहतरीन है। सैयद ज़ीशान क़ादरी ने इनवेस्टिगेटिंग अफसर के रूप में प्रभावित किया है, तो प्रशंसा शर्मा ने जीशान की पत्तीनी के रूप में शानदार रोल किया है।

आशीष आर। शुक्ला ने ‘बिच्छू का खेल’ के निर्देशन को नाम के अनुरूप ही रखा है। बीच-बीच में 80 और 90 के दौर के गाने बैकग्राउंड म्‍यूजिक के रूप में अच्‍छी फीलिंग देते हैं। बब्बू और अखिल के बीच बाप-बेटे का रिश्ता होने पर भी जो संवाद अदायगी है, वह अपने आप में खुलेपन के लिए है। जिब्रान नूरानी का स्क्रीनप्ले उछाल है और रुकने का मौका नहीं देता है। क्षितिज रॉय के तीख़े और चटपटे संवाद किरदारों को सूट करते दिखते हैं। कुछ डायलॉग करते हैं, जैसे-

  • जब पूरा सिस्टम आपका ख़िलाफ़ हो जाए तो ख़ुद सिस्टम बनना पड़ता है।
  • सार्वजनिक कन्फर्म सीट वाले को भी उठाता है।
  • भगवान से नहीं तो इस प्रणाली से डरो।
  • घास अगर बागी हो जाए तो पूरे शहर को जंगल बना देती है।

कलाकार: दिव्येंदु, अंशुल चौहान, सैयद ज़ीशान क़ादरी, राजेश शर्मा, तृष्णा मुखर्जी आदि।
निर्देशक: आशीष आर। शुक्ला
निर्माता: एकता कपूर, शोभा कपूर

संबंधित लेख



पहली प्रकाशित: 20 नवंबर 2020, 08:19:53 अपराह्न

सभी के लिए नवीनतम मनोरंजन समाचार, वेब सीरीज न्यूज़, न्यूज नेशन डाउनलोड करें एंड्रॉयड तथा आईओएस मोबाईल ऐप्स।



Source link

Leave a Comment